गांव अहमदबास/डुंगरियाबास की बहू ने रचा इतिहास, हरियाणा शिक्षा विभाग में बनी संस्कृत विषय की लेक्चरर।
इंडिया क्राइम तक न्यूज
(बिलाल अहमद)
ब्यूरो रिपोर्ट नूह मेवात।
बड़ी खबर:मेवात क्षेत्र की पहली मेव मुस्लिम महिला पढ़ाएगी देववाणी संस्कृत का पाठ।
गांव अहमदबास/डुंगरियाबास की बहू ने रचा इतिहास, हरियाणा शिक्षा विभाग में बनी संस्कृत विषय की लेक्चरर।
फिरोजपुर झिरका : उपमंडल के गांव अहमदबास की बहू शबनम अंजुम मोर ने संस्कृत विषय में पीजीटी का पद हांसिल कर इलाके का नाम रोशन किया है। शबनम अंजुम मोर मेवात क्षेत्र की पहली मुस्लिम महिला हैं जिन्होंने संस्कृत जैसे विषय में लेक्चरर बन इतिहास रचा है। शबनम की इस उपलब्धि पर जहां क्षेत्र में हर्ष का माहौल है तो वहीं उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र व समाज की बेटियों के लिए एक प्रेरणादायक भी है। शबनम अंजुम मोर के लेक्चरर बनने पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
संस्कृत की लेक्चरर बनने का सपना हुआ पूरा :
शबनम बानो ने बताया कि उसका बचपन से ही संस्कृत विषय में लेक्चरर बनने का सपना रहा था। इसीलिए उन्होंने एकदम लीक से हटकर संस्कृत विषय का चुनाव कर गहन रुचि से पढ़ाई की। लेकिन शादी के बाद उसे लगा कि उसका यह सपना अब कभी पूरा नहीं हो सकेगा। लेकिन पति सरफराज अंजुम मोर ने मेरे हौंसलों को उड़ान देते हुए मेरा यह सपना आज पूरा करा दिया है। शबनम बानो बताती हैं कि हमारे मुस्लिम समाज में संस्कृत विषय को दूसरे समुदाय के लोगों का विषय माना जाता है जबकि ऐसा नहीं मानना चाहिए। क्योंकि कोई भी भाषा किसी धर्म विशेष की जागीर नही होती। वैसे भी भारतीय परम्पराओं के अनुसार संस्कृत भाषा को सभी भाषाओं की जननी व मूलभाषा माना जाता हैं। उनका मानना है कि वो संस्कृत विषय को समाज के प्रत्येक तबके तक पहुंचाकर दम लेंगी। और हिन्दू-मुस्लिम एकता का शुत्रधार बन समाज मे फैले मनगढ़ंत मतभेदों को दूर करने का सकारात्मक प्रयास करेंगी।
शैक्षिक योग्यता: बी.ए.(संस्कृत), एम.ए.(संस्कृत व राजनीति शास्त्र) ,बी.एड.(संस्कृत), एल. एल.बी. - सभी शेक्षणिक उपाधि राजस्थान विश्विद्यालय- जयपुर से प्राप्त की हैं।
परिवार से मिली आगे बढऩे की प्रेरणा : अहमदबास गांव में बिहायी शबनम बानो तिजारा राजस्थान की रहने वाली हैं। उनका परिवार अपने आप में तालीमी इदारे जैसा है। दरअसल उनके पति खुद एक अध्यापक रह चुके हैं ,और फिलहाल हरियाणा हाई कोर्ट-चंडीगढ़ में वक़ालत करते हैं ,वही उनके ससुर मोहम्मद इस्लाम खान हरियाणा बिजली बोर्ड में फोरमैन के पद पर कार्यरत हैं । देवर मौ. आज़ाद मोर कोटक महिंद्रा बैंक में कार्यरत हैं ।एक ननद डॉक्टर की पढ़ाई कर रही हैं ,तो उनकी दो ननद जेबीटी कर चुकी हैं। उनके मायके में भी सारा परिवार पढ़ा लिखा है ,जहां पिता चौधरी राय खान तिजारा अलवर में एक बहुत मशहूर वकील हैं। तो बड़े भाई समीउल्ला खान बीएसएनएल में एसडीओ के पद पर है। जबकि दूसरा भाई नाजिम हुसैन वकालत से जुड़े हुए हैं। शबनम के तीसरे भाई मोहम्मद हुसैन ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इंग्लैंड से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स किया है। वो लंदन में ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। चौथा भाई मोहम्मद शाहिद बेंगलूरु की एक नामी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर तैनात है। शबनम की तीन बहनें भी सरकारी पदों पर काबिज हैं। इसी के चलते उन्हें आगे बढऩे की प्रेरणा परिवार के सदस्यों से ही मिली। शबनम ने बताया कि मेवात क्षेत्र में महिलाओं की शैक्षणिक स्थित न के बराबर है। ऐसे में वो यहां की बेटियों को तालीम देकर उन्हें सशक्त बनाना चाहती हैं। क्योंकि तालीम ही वो हथियार है जिससे मुस्लिम कौम दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त ,तरक्की और आला मकाम हासिल कर सकती हैं।
(बिलाल अहमद)
ब्यूरो रिपोर्ट नूह मेवात।
बड़ी खबर:मेवात क्षेत्र की पहली मेव मुस्लिम महिला पढ़ाएगी देववाणी संस्कृत का पाठ।
गांव अहमदबास/डुंगरियाबास की बहू ने रचा इतिहास, हरियाणा शिक्षा विभाग में बनी संस्कृत विषय की लेक्चरर।
फिरोजपुर झिरका : उपमंडल के गांव अहमदबास की बहू शबनम अंजुम मोर ने संस्कृत विषय में पीजीटी का पद हांसिल कर इलाके का नाम रोशन किया है। शबनम अंजुम मोर मेवात क्षेत्र की पहली मुस्लिम महिला हैं जिन्होंने संस्कृत जैसे विषय में लेक्चरर बन इतिहास रचा है। शबनम की इस उपलब्धि पर जहां क्षेत्र में हर्ष का माहौल है तो वहीं उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र व समाज की बेटियों के लिए एक प्रेरणादायक भी है। शबनम अंजुम मोर के लेक्चरर बनने पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
संस्कृत की लेक्चरर बनने का सपना हुआ पूरा :
शबनम बानो ने बताया कि उसका बचपन से ही संस्कृत विषय में लेक्चरर बनने का सपना रहा था। इसीलिए उन्होंने एकदम लीक से हटकर संस्कृत विषय का चुनाव कर गहन रुचि से पढ़ाई की। लेकिन शादी के बाद उसे लगा कि उसका यह सपना अब कभी पूरा नहीं हो सकेगा। लेकिन पति सरफराज अंजुम मोर ने मेरे हौंसलों को उड़ान देते हुए मेरा यह सपना आज पूरा करा दिया है। शबनम बानो बताती हैं कि हमारे मुस्लिम समाज में संस्कृत विषय को दूसरे समुदाय के लोगों का विषय माना जाता है जबकि ऐसा नहीं मानना चाहिए। क्योंकि कोई भी भाषा किसी धर्म विशेष की जागीर नही होती। वैसे भी भारतीय परम्पराओं के अनुसार संस्कृत भाषा को सभी भाषाओं की जननी व मूलभाषा माना जाता हैं। उनका मानना है कि वो संस्कृत विषय को समाज के प्रत्येक तबके तक पहुंचाकर दम लेंगी। और हिन्दू-मुस्लिम एकता का शुत्रधार बन समाज मे फैले मनगढ़ंत मतभेदों को दूर करने का सकारात्मक प्रयास करेंगी।
शैक्षिक योग्यता: बी.ए.(संस्कृत), एम.ए.(संस्कृत व राजनीति शास्त्र) ,बी.एड.(संस्कृत), एल. एल.बी. - सभी शेक्षणिक उपाधि राजस्थान विश्विद्यालय- जयपुर से प्राप्त की हैं।
परिवार से मिली आगे बढऩे की प्रेरणा : अहमदबास गांव में बिहायी शबनम बानो तिजारा राजस्थान की रहने वाली हैं। उनका परिवार अपने आप में तालीमी इदारे जैसा है। दरअसल उनके पति खुद एक अध्यापक रह चुके हैं ,और फिलहाल हरियाणा हाई कोर्ट-चंडीगढ़ में वक़ालत करते हैं ,वही उनके ससुर मोहम्मद इस्लाम खान हरियाणा बिजली बोर्ड में फोरमैन के पद पर कार्यरत हैं । देवर मौ. आज़ाद मोर कोटक महिंद्रा बैंक में कार्यरत हैं ।एक ननद डॉक्टर की पढ़ाई कर रही हैं ,तो उनकी दो ननद जेबीटी कर चुकी हैं। उनके मायके में भी सारा परिवार पढ़ा लिखा है ,जहां पिता चौधरी राय खान तिजारा अलवर में एक बहुत मशहूर वकील हैं। तो बड़े भाई समीउल्ला खान बीएसएनएल में एसडीओ के पद पर है। जबकि दूसरा भाई नाजिम हुसैन वकालत से जुड़े हुए हैं। शबनम के तीसरे भाई मोहम्मद हुसैन ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इंग्लैंड से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स किया है। वो लंदन में ही सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। चौथा भाई मोहम्मद शाहिद बेंगलूरु की एक नामी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर तैनात है। शबनम की तीन बहनें भी सरकारी पदों पर काबिज हैं। इसी के चलते उन्हें आगे बढऩे की प्रेरणा परिवार के सदस्यों से ही मिली। शबनम ने बताया कि मेवात क्षेत्र में महिलाओं की शैक्षणिक स्थित न के बराबर है। ऐसे में वो यहां की बेटियों को तालीम देकर उन्हें सशक्त बनाना चाहती हैं। क्योंकि तालीम ही वो हथियार है जिससे मुस्लिम कौम दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त ,तरक्की और आला मकाम हासिल कर सकती हैं।

Comments
Post a Comment