खास खबर:गणतंत्र दिवस के मौके पर एशियन ह्यूमैनिटी फाउंडेशन ने दिया कौमी एकता का संदेश:मौलाना हकमुद्दीन
इंडिया क्राईम तक न्यूज़
(बिलाल अहमद)
ब्यूरो रिपोर्ट नूह मेवात।
खास खबर:गणतंत्र दिवस के मौके पर एशियन ह्यूमैनिटी फाउंडेशन ने दिया कौमी एकता का संदेश:मौलाना हकमुद्दीन
दिल से निकलेगी न मर करभी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी।
मौलाना ने कहा कि हमारा धर्म हमे वतन से मोहब्बत सिखाता है, धर्म ने हमे हुब्बुल वतनी का संदेश दिया है जिसका मतलब कौमी एकता ही है । एक देश में रह रहे लोगों के बीच एकता की शक्ति के बारे में लोगों को जागरुक बनाने के लिये ‘राष्ट्रीय एकता’ एक तरीका है। हमारे देश में अलग संस्कृति, नस्ल, जाति और धर्म के लोगों के बीच समानता के लिए राष्ट्रीय एकता के बारे में बताना बेहद जरूरी है । हम यहाँ पर स्कूल जाने वाले विभिन्न आयु वर्ग और कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों के लिये अलग-अलग शब्द सीमा में राष्ट्रीय एकता पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया । इसका प्रयोग वो किसी भी स्कूली परीक्षा तथा अन्य प्रतियोगिताओं में कर सकते हैं ।
एशियन ह्यूमैनिटी फाउंडेशन के फाउंडर एंड डायरेक्टर नसीम खान ने कहा कि राष्ट्रीय एकीकरण को राष्ट्रीय एकता दिवस भी कहा जाता है। देश के लोगों के बीच असमानता को मिटाना और कौमी एक जहति लाना हमारी संस्था की कोशिस है । देश में राष्ट्रीय एकता लाने के लिये किसी समूह, समाज, समुदाय और पूरे देश के लोगों के बीच एकता को मजबूती देने के लिये ये बढ़ावा देता है। किसी सत्ता के द्वारा ये कोई एक दबाव नहीं है बल्कि भारत को एक विकसित देश बनाने के लिये ये लोगों से आग्रह है। ये केवल लोगों की एकता और सौहार्द के द्वारा ही संभव होगा हम लगातार इस बारे में कोशिस कर रहे हैं ताकि एकता को मजबूत किया जा सके । अपने भावनात्मक संबंध को बढ़ाने के लिये उन्हें अपने विचार, मूल्य और दूसरे मुद्दों को बाँटना चाहिये। लोगों को विविधता के अंदर एकता को जीना और महसूस करना चाहिये और अपने राष्ट्र की पहचान एक सुप्रीम शक्ति के रुप में बनानी चाहिये हमे इस बारे में सोचने की जरूरत है यही हमारी संस्था का लक्ष्य है ।
सग़ीर ने कहा कि अपने देश में व्यक्तिगत स्तर के विकास को बढ़ाने के लिये भारत में राष्ट्रीय एकीकरण का बहुत महत्व है और ये ही हमे एक मजबूत देश बनाता है। पूरी तरह से लोगों को इसके प्रति जागरुक बनाने के लिये नवंबर महीने में महीनों तक कौमी एकता दिवस मनाया जाता है ताकि एकता का संदेश दिया जा सके ।
अकबर ने कहा कि एकीकरण का वास्तविक अर्थ है अलग-अलग भागों को एक बनाने के लिये जोड़ना। भारत एक ऐसा देश है जहाँ लोग विभिन्न धर्म, क्षेत्र, संस्कृति, परंपरा, नस्ल, जाति, रंग और पंथ के लोग एक साथ रहते हैं। इसलिये, राष्ट्रीय एकीकरण बनाने के लिये भारत में लोगों का एकीकरण जरुरी है। अगर एकता के द्वारा अलग-अलग धर्मों और संस्कृति के लोग एक साथ रहते हैं, वहाँ पर कोई भी सामाजिक या विकासात्मक समस्या नहीं होगी। भारत में इसे विविधता में एकता के रुप में जाना जाता है ।
अमज़द खान निर्देशक हाजी बक्सी मेमोरियल स्कूल सत्पुत्याका, जिला नूह ने कहा कि
भारत एक ऐसी भूमि है जहाँ अपनी अनोखी संस्कृति और विविध जीवनशैली को मानने वाले लोग रहते हैं। ये बहुत ही साफ है कि हमें हमारे जीवन में राष्ट्रीय एकीकरण के अर्थ को समझने की जरुरत है और अपने देश को एक पहचान देने के लिये संविधान को मानने की जरूरत है इसी के रास्ते आगे जाया जा सकता है। भारत में लोग विभिन्न धर्म, जाति, समुदाय, नस्ल और सांस्कृतिक समूह से संबंध रखते हैं जैसे कि मेरे स्कूल के विद्यार्थी , यानी विद्यार्थी शब्द में कोई जाति धर्म नही दिखती हम ऐसे ही समुदाय व देश की कल्पना करते हैं जिसके बारे में हम प्रेर के समय विद्यार्थियों को बताते है और वर्षों से एक साथ रहना भी हमारी एकता का संदेश हैं।
शारुख और वसीम टपूकड़ा ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को विविध धर्म, जाति और पंथ ने समृद्ध बनाया हुआ है जिसने यहाँ पर एक मिश्रित संस्कृति को सामने रखा है बच्चों ने अलग अलग तरीके से कौमी एकता के बारे में भाषण दिया और कहा कि ये बहुत ही साफ है कि भारत में हमेशा राजनीतिक एकता की कमी रही है।
भारत में केवल एक बार राजनीतिक एकता दिखाई दी थी जब सभी ने मिलकर 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया गया था। अंग्रेजों ने यहाँ कई प्रकार से बाँटो और राज करो की नीति अपनाई थी हालाँकि, इसमें वो बाद में असफल हो गये थे। कुछ बिंदु जैसे सांस्कृतिक एकता, रक्षात्मक निरंतरता, संविधान, कला, साहित्य, सामान्य आर्थिक समस्याएँ, राष्ट्रीय ध्वज़, राष्ट्र गान, राष्ट्रीय उत्सव और राष्ट्रीय प्रतीक के द्वारा भारत में राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा दिया जाता है। हमारी संस्था की कोशिस है कि हम मेवात एरिया के हर गांव तक राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुचाए । सत्पुत्यका गांव की बडी मस्जिद के इमाम मौलाना हकमुद्दीन ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया फिर स्कूल के बच्चों ने राष्ट्रीय गान गाया । सभी प्रतिभागियों को एशियन ह्यूमैनिटी फाउंडेशन की तरह से इनामात व खाने का प्रबंध किया गया ।
आज के इस मोके पर एशियन ह्यूमैनिटी फाउंडेशन की टीम , बक्सी स्कूल का स्टाफ, सैकड़ो विद्यार्थी, दर्जनों मदरसे के तलबा व ग्रामीण मौजूद थे ।
(बिलाल अहमद)
ब्यूरो रिपोर्ट नूह मेवात।
खास खबर:गणतंत्र दिवस के मौके पर एशियन ह्यूमैनिटी फाउंडेशन ने दिया कौमी एकता का संदेश:मौलाना हकमुद्दीन
दिल से निकलेगी न मर करभी वतन की उल्फ़त
मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी।
मौलाना ने कहा कि हमारा धर्म हमे वतन से मोहब्बत सिखाता है, धर्म ने हमे हुब्बुल वतनी का संदेश दिया है जिसका मतलब कौमी एकता ही है । एक देश में रह रहे लोगों के बीच एकता की शक्ति के बारे में लोगों को जागरुक बनाने के लिये ‘राष्ट्रीय एकता’ एक तरीका है। हमारे देश में अलग संस्कृति, नस्ल, जाति और धर्म के लोगों के बीच समानता के लिए राष्ट्रीय एकता के बारे में बताना बेहद जरूरी है । हम यहाँ पर स्कूल जाने वाले विभिन्न आयु वर्ग और कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों के लिये अलग-अलग शब्द सीमा में राष्ट्रीय एकता पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया । इसका प्रयोग वो किसी भी स्कूली परीक्षा तथा अन्य प्रतियोगिताओं में कर सकते हैं ।
एशियन ह्यूमैनिटी फाउंडेशन के फाउंडर एंड डायरेक्टर नसीम खान ने कहा कि राष्ट्रीय एकीकरण को राष्ट्रीय एकता दिवस भी कहा जाता है। देश के लोगों के बीच असमानता को मिटाना और कौमी एक जहति लाना हमारी संस्था की कोशिस है । देश में राष्ट्रीय एकता लाने के लिये किसी समूह, समाज, समुदाय और पूरे देश के लोगों के बीच एकता को मजबूती देने के लिये ये बढ़ावा देता है। किसी सत्ता के द्वारा ये कोई एक दबाव नहीं है बल्कि भारत को एक विकसित देश बनाने के लिये ये लोगों से आग्रह है। ये केवल लोगों की एकता और सौहार्द के द्वारा ही संभव होगा हम लगातार इस बारे में कोशिस कर रहे हैं ताकि एकता को मजबूत किया जा सके । अपने भावनात्मक संबंध को बढ़ाने के लिये उन्हें अपने विचार, मूल्य और दूसरे मुद्दों को बाँटना चाहिये। लोगों को विविधता के अंदर एकता को जीना और महसूस करना चाहिये और अपने राष्ट्र की पहचान एक सुप्रीम शक्ति के रुप में बनानी चाहिये हमे इस बारे में सोचने की जरूरत है यही हमारी संस्था का लक्ष्य है ।
सग़ीर ने कहा कि अपने देश में व्यक्तिगत स्तर के विकास को बढ़ाने के लिये भारत में राष्ट्रीय एकीकरण का बहुत महत्व है और ये ही हमे एक मजबूत देश बनाता है। पूरी तरह से लोगों को इसके प्रति जागरुक बनाने के लिये नवंबर महीने में महीनों तक कौमी एकता दिवस मनाया जाता है ताकि एकता का संदेश दिया जा सके ।
अकबर ने कहा कि एकीकरण का वास्तविक अर्थ है अलग-अलग भागों को एक बनाने के लिये जोड़ना। भारत एक ऐसा देश है जहाँ लोग विभिन्न धर्म, क्षेत्र, संस्कृति, परंपरा, नस्ल, जाति, रंग और पंथ के लोग एक साथ रहते हैं। इसलिये, राष्ट्रीय एकीकरण बनाने के लिये भारत में लोगों का एकीकरण जरुरी है। अगर एकता के द्वारा अलग-अलग धर्मों और संस्कृति के लोग एक साथ रहते हैं, वहाँ पर कोई भी सामाजिक या विकासात्मक समस्या नहीं होगी। भारत में इसे विविधता में एकता के रुप में जाना जाता है ।
अमज़द खान निर्देशक हाजी बक्सी मेमोरियल स्कूल सत्पुत्याका, जिला नूह ने कहा कि
भारत एक ऐसी भूमि है जहाँ अपनी अनोखी संस्कृति और विविध जीवनशैली को मानने वाले लोग रहते हैं। ये बहुत ही साफ है कि हमें हमारे जीवन में राष्ट्रीय एकीकरण के अर्थ को समझने की जरुरत है और अपने देश को एक पहचान देने के लिये संविधान को मानने की जरूरत है इसी के रास्ते आगे जाया जा सकता है। भारत में लोग विभिन्न धर्म, जाति, समुदाय, नस्ल और सांस्कृतिक समूह से संबंध रखते हैं जैसे कि मेरे स्कूल के विद्यार्थी , यानी विद्यार्थी शब्द में कोई जाति धर्म नही दिखती हम ऐसे ही समुदाय व देश की कल्पना करते हैं जिसके बारे में हम प्रेर के समय विद्यार्थियों को बताते है और वर्षों से एक साथ रहना भी हमारी एकता का संदेश हैं।
शारुख और वसीम टपूकड़ा ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को विविध धर्म, जाति और पंथ ने समृद्ध बनाया हुआ है जिसने यहाँ पर एक मिश्रित संस्कृति को सामने रखा है बच्चों ने अलग अलग तरीके से कौमी एकता के बारे में भाषण दिया और कहा कि ये बहुत ही साफ है कि भारत में हमेशा राजनीतिक एकता की कमी रही है।
भारत में केवल एक बार राजनीतिक एकता दिखाई दी थी जब सभी ने मिलकर 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया गया था। अंग्रेजों ने यहाँ कई प्रकार से बाँटो और राज करो की नीति अपनाई थी हालाँकि, इसमें वो बाद में असफल हो गये थे। कुछ बिंदु जैसे सांस्कृतिक एकता, रक्षात्मक निरंतरता, संविधान, कला, साहित्य, सामान्य आर्थिक समस्याएँ, राष्ट्रीय ध्वज़, राष्ट्र गान, राष्ट्रीय उत्सव और राष्ट्रीय प्रतीक के द्वारा भारत में राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा दिया जाता है। हमारी संस्था की कोशिस है कि हम मेवात एरिया के हर गांव तक राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुचाए । सत्पुत्यका गांव की बडी मस्जिद के इमाम मौलाना हकमुद्दीन ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया फिर स्कूल के बच्चों ने राष्ट्रीय गान गाया । सभी प्रतिभागियों को एशियन ह्यूमैनिटी फाउंडेशन की तरह से इनामात व खाने का प्रबंध किया गया ।
आज के इस मोके पर एशियन ह्यूमैनिटी फाउंडेशन की टीम , बक्सी स्कूल का स्टाफ, सैकड़ो विद्यार्थी, दर्जनों मदरसे के तलबा व ग्रामीण मौजूद थे ।

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