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कोरोना महामारी पर काबू पाने के लिए शिवमंदिर विकास समिति ने लिया निर्णय।
बिलाल अहमद/ब्यूरो नूह मेवात।
फिरोजपुर झिरका : वैश्विक महामारी कोरोना पर नियंत्रण पर पाने के लिए फिरोजपुर झिरका की शिवमंदिर विकास समिति ने ऐतिहासिक पांडव कालीन शिवमंदिर के कपाट 6 जुलाई से 5 अगस्त तक बंद रखने का निर्णय लिया है। 175 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब प्राचीन शिवमंदिर के कपाट कोरोना महामारी के चलते बंद रहेंगे।
इस बारे में फिरोजपुर झिरका शिवमंदिर विकास समिति के प्रधान अनिल गोयल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस समय कोरोना महामारी देश में तेजी से फैलती जा रही है। इसकी रोकथाम को लेकर केंद्र एवं प्रदेश सरकार के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। सरकारी दिशा-निर्देशानुसार कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए शारीरिक दूरी बनाए रखने को लेकर जो गाइडलाइन धार्मिक स्थलों को लेकर जारी हुई हैं उसी की पालना करते हुए मंदिर के कपाट बंद करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि पौने दो सौ साल के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब मेवात के सबसे पुराने एवं ऐतिहासिक पांडव कालीन शिवमंदिर के कपाट बंद होंगे। इससे पहले यह मौका मंदिर के इतिहास में अभी तक नहीं आया था। उन्होंने बताया कि 25 मार्च को जैसे ही लॉकडाउन की घोषणा हुई तो मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने निर्णय लेकर मंदिर के कपाट को बंद रखने को निर्णय लिया था। उन्होंने बताया कि आगामी 19 जुलाई को शिवरात्रि का पर्व है। ऐसे में सावन के महीने में आने वाले इस पर्व पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर पर मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा। अंत में प्रधान अनिल गोयल ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा वो इस बार शिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा-अर्चना अपने घरों से ही कर कोरोना महामारी से विजय पाने की प्रार्थना करें।
मंदिर का इतिहास
कैसे हुई मंदिर की खोज:- सन 1846 के तत्कालीन तहसीलदार जीेवन लाल शर्मा को तिजारा मार्ग स्थित अरावली पर्वत श्रंृख्लाओं में शिवलिंग के होने का सपना दिखाई दिया था। इसका अनुशरण करते हुए तहसीलदार ने भोले शंकर की पवित्र शिवलिंग को खोज निकाला और उस स्थान पर पूजा अर्चना शुरू कर दी। आस-पास के इलाकों में जब यह खबर पहुंची तो यहां पर श्रृद्धालुओं का जमघट लगना शुरू हो गया। उसी समय से श्रद्धा का केन्द्र रहें इस पौराणिक धार्मिक स्थल की लोकप्रियता दूर-दराज के राज्यों में भी बढ़ती चली गई।
फिरोजपुर झिरका से 5 किलोमीटर तिजारा मार्ग पर स्थित शिव मन्दिर पर शिव रात्रि के मौके पर लगने वाले मेले में श्रृद्धालु नीलकंठ, गौमुख व हरिद्वार से कांवड़ लाकर पवित्र शिव लिंग पर जलाभिषेक करते हैं और अपनी इच्छा पूर्ति के लिए भोले बाबा से कामना करते हंै। इसके अलावा क्षेत्र की नवविवाहित महिलएं संतान प्राप्ति के लिए एवं अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर पवित्र शिव लिंग पर दोघड चढाती हैं। मौजूदा हाल में शिव मन्दिर में देखरख शिव मन्दिर विकास समिति कर रही है। शिव मन्दिर विकास समिति के अध्यक्ष अनिल गोयल है जो कि इस समिति के साथ मिलकर इस मन्दिर के विकास कार्यो की देख रेख करते है। समिति की ओर से दर्शनार्थ आने वाले श्रृद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशालाएं बनी हुई हैं। वर्ष भर इस धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मगर शिव रात्रि के अवसर पर इस पवित्र मन्दिर की महिमा और अधिक बढ जाती है। मान्यता है कि इस अवसर पर भोले भंडारी किसी न किसी रूप में अपने भक्तों को अवश्य दर्शन देते है।
आस्था:- प्राचीन समय से यहां एक कदम का वृक्ष है। लोगों की यह मान्यता है कि इस वृक्ष पर अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए जो सच्चे मन से रिब्बन, धागा बांधा जाता है उसकी मुराद अवश्य पूरी होती है। वहीं निस्ंतान महिलाओं को भी शिवलिंग पर जलाभिषेक कर कदम के वृक्ष पर धागा बांधने से संतान की प्राप्ति होती है। मनोकामना पूरी होने पर यह भक्तजन यहां मन्दिर परिसर में भंडारा आदि करते है। वहीं तिजारा राजस्थान के गांव 17 किलोमीटर दूर व फिरोजपुर झिरका से 5 किलोमीटर दूर तक पेट के बल बच्चे,महिलाए व पुरुष (दंडोती) लगा कर अपनी मन्नते मांगते हैं।

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