मेवात क्राईम तक न्यूज़
“ जिला पुलिस ने जीवन को हां, नशे को ना जैसे स्लोगनों से लोगों को किया जागरुक”
बिलाल अहमद/ब्यूरो नूह मेवात।
जिला पुलिस नूंह द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस के सम्बन्ध में नशा मुक्ति सप्ताह के रुप में मनाया जा रहा है । इस दौरान जिला पुलिस के सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिये गये हैं कि वह अपने – 2 थाना क्षेत्र में अलग – 2 तरीके से आमजन को नशा ना करने बारे जागरुक करें । सामाजिक संगठनो, बस स्टेंडों, टैक्सी स्टेंडों व सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को नशा से दूर रहने तथा नशा से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाये । पुलिस अधीक्षक, नूंह की तरफ से सभी उप पुलिस अधीक्षक, प्रबन्धक थाना, चौकी प्रभारियों को निर्देश दिये गये हैं कि 26 जून को विश्व एन्टी ड्रग डे के रुप में मनाया जायेगा । आमजन खासकर युवा पीडी को नशे से होने वाले शारीरिक तथा वित्तीय दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से समझाया जाये । पुलिस अधीक्षक, नूंह ने कहा कि नशा ही सभी प्रकार के अपराधों की जड है । आज के युवा यदि अपने जीवन में कामयाब होना चाहते हैं तो उन्हें नशे से दूर रहना होगा । नशा करने वाला व्यक्ति ही नहीं ब्लकि उसका पूरा परिवार पतन की ओर बढता चला जाता है । नशा एक ऐसी लत है जिसे छोडना मुश्किल तो है लेकिन नामुमकिन नहीं । यदि आम नागरिक इसके प्रति जागरुक होगा तो नशे की दलदल से बाहर निकला जा सकता है । देश को केवल कानून के द्वारा नशा मुक्त नहीं किया जा सकता । स्वास्थ्य विभाग का भी कर्तव्य बनता है कि जीवन रक्षक औषधियों के रुप में प्रयोग होने वाली औषधियों का प्रयोग केवल चिकित्सक के परामर्शानुसार ही किया जाये । प्राय: देखने में आता है कि कुछ जीवन रक्षक औषधियों का अत्याधिक प्रयोग नशे के लिये किया जाता है । जिस पर सम्बन्धित विभाग द्वारा समय -2 पर दवा विक्रेताओं को चौक करके उनके विरुद्ध नियमानुसार कानुनी कार्यवाही अमल में लाई जाये । ताकि नशा में संलिप्त लोगों को नशा पूर्ती करने में मुश्किल आये । आज के युग में अभिभावकों का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने के साथ – 2 उनकी दैनिक गतिविधियों पर भी ध्यान रखें तथा आम नागरिकों का भी यह नैतिक कर्तव्य है कि वे अपने आस – पास नशे के कारोबार में लगे लोगों पर नजर रखें । कानून चाहे कितना भी सख्त क्यों ना हो, आम जनता के सहयोग के बिना किसी काम का नहीं है । नशा देश को लकडे के घुन की तरह बर्बाद कर रहा है । नशे के धन्धे में लगे लोगों पर आम नागरिकों की सहायता से ही रोक लगाई जा सकती है । नशा तस्कर ज्यादातर अवोध बालकों को ही अपना शिकार बनाते हैं इसके अतिरिक्त झुग्गी – झोंपडी तथा गरीब लोगों को पैसे का लालच देकर उऩका प्रयोग करते हैं । पुलिस अधिकारियों / कर्मचारियों का भी कर्तव्य बनता है कि इस प्रकार के लोगों पर ज्यादा ध्यान दें तथा उन्हें समय – 2 पर नशे के दुष्परिणामों से अवगत करायें । खासकर युवा बच्चों को नशा से दूर रखने का प्रयाश किया जाये।

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