इंडिया क्राईम तक न्यूज़
(बिलाल अहमद)
ब्यूरो रिपोर्ट नूह मेवात।
खास खबर:ग्रामीण आजीविका मिशन बना रहा ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर।
महिलाओं के लिए वरदान बना 'ग्रामीण आजीविका मिशन।
नूंह, 04 फरवरी:- राष्ट्रीय आजीविका मिशन योजना के अन्तर्गत 31 हजार से अधिक गरीब परिवारों को जोड़ा गया है। जिन्हें 22.19 करोड़ रुपए की राशि बैंक द्वारा आजीविका अर्जित करने के लिए ऋण के रुप में प्रदान की गई है। अतिरिक्त उपायुक्त विक्रम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की ग्रामीण आजीविका मिशन योजना महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। महिलाएं ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत घर से बाहर निकलकर अपना व्यवसाय चला रही हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। इस योजना की विशेष बात ये है कि इस योजना मेंं उन महिलाओं को शामिल किया जा रहा है जिनकी आर्थिक स्थित बहुत ही कमजोर होती है। योजना के तहत समूह बनाकर इन महिलाओं को बैंक के माध्यम से मामूली ब्याज दरों पर बैंक ऋण उपलब्ध करवा कर उनका व्यवसाय शुरू करवाया जाता है। सरकार की इस योजनाए से महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी सुधरने लगी है और वे अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।
हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं का सामाजिक एवं आर्थिक विकास हो रहा है। योजना का लाभ ले रही महिलाओं का कहना है कि आजीविका मिशन ने उनकी व उनके परिवार की दशा बदल दी है। ग्रामीण क्षेत्र में बहुत सी महिलाएं घर का काम करने के बाद अपने आपको खाली महसूस करती हैं। इस योजना के माध्यम से परिवार को आगे बढ़ाने व परिवार को आर्थिक सहयोग देने के उद्देश्य से उन्होंने हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में शामिल होकर जीवन की नई शुरूआत की है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य सभी गरीब परिवारों तक पहुंचना और सम्मानजनक एवं बेहतर जीवन यापन करने के अवसर प्रदान करना है। हरियाणा प्रदेश में इस कार्यक्रम का प्रभावी कार्यान्वयन किया जा रहा है। राज्य में महिलाओं को स्वंय सहायता समूहों के माध्यम से मिशन की मुख्यधारा में सम्मिलित किया गया है। मिशन का उद्देश्य गरीब परिवारों की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना है। गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिये गरीब परिवारों की महिलाओं में सामाजिक संचेतना, संस्थागत और क्षमता निर्माण, वित्तीय समावेशन, संतृप्ति दृष्टिकोण, कौशल व आजीविका का सृजन करना है ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
(बिलाल अहमद)
ब्यूरो रिपोर्ट नूह मेवात।
खास खबर:ग्रामीण आजीविका मिशन बना रहा ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर।
महिलाओं के लिए वरदान बना 'ग्रामीण आजीविका मिशन।
नूंह, 04 फरवरी:- राष्ट्रीय आजीविका मिशन योजना के अन्तर्गत 31 हजार से अधिक गरीब परिवारों को जोड़ा गया है। जिन्हें 22.19 करोड़ रुपए की राशि बैंक द्वारा आजीविका अर्जित करने के लिए ऋण के रुप में प्रदान की गई है। अतिरिक्त उपायुक्त विक्रम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की ग्रामीण आजीविका मिशन योजना महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। महिलाएं ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत घर से बाहर निकलकर अपना व्यवसाय चला रही हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। इस योजना की विशेष बात ये है कि इस योजना मेंं उन महिलाओं को शामिल किया जा रहा है जिनकी आर्थिक स्थित बहुत ही कमजोर होती है। योजना के तहत समूह बनाकर इन महिलाओं को बैंक के माध्यम से मामूली ब्याज दरों पर बैंक ऋण उपलब्ध करवा कर उनका व्यवसाय शुरू करवाया जाता है। सरकार की इस योजनाए से महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी सुधरने लगी है और वे अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।
हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं का सामाजिक एवं आर्थिक विकास हो रहा है। योजना का लाभ ले रही महिलाओं का कहना है कि आजीविका मिशन ने उनकी व उनके परिवार की दशा बदल दी है। ग्रामीण क्षेत्र में बहुत सी महिलाएं घर का काम करने के बाद अपने आपको खाली महसूस करती हैं। इस योजना के माध्यम से परिवार को आगे बढ़ाने व परिवार को आर्थिक सहयोग देने के उद्देश्य से उन्होंने हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में शामिल होकर जीवन की नई शुरूआत की है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य सभी गरीब परिवारों तक पहुंचना और सम्मानजनक एवं बेहतर जीवन यापन करने के अवसर प्रदान करना है। हरियाणा प्रदेश में इस कार्यक्रम का प्रभावी कार्यान्वयन किया जा रहा है। राज्य में महिलाओं को स्वंय सहायता समूहों के माध्यम से मिशन की मुख्यधारा में सम्मिलित किया गया है। मिशन का उद्देश्य गरीब परिवारों की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना है। गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिये गरीब परिवारों की महिलाओं में सामाजिक संचेतना, संस्थागत और क्षमता निर्माण, वित्तीय समावेशन, संतृप्ति दृष्टिकोण, कौशल व आजीविका का सृजन करना है ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

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