खास खबर:खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रण मामले के मंत्री करण देव कंबोज ने नगीना खंड के गांव भादस में महर्षि दयानंद आर्य गुरुकुल गोशाला के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे।
इंडिया क्राइम तक न्यूज़
(बिलाल अहमद)
ब्यूरो रिपोर्ट नूह मेवात।
खास खबर:खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रण मामले के मंत्री करण देव कंबोज ने नगीना खंड के गांव भादस में महर्षि दयानंद आर्य गुरुकुल गोशाला के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे।
खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रण मामले मंत्री कर्ण देव कम्बोज ने नगीना खंड के गांव भादस में महर्षि दयानंद आर्य गुरुकुल एवं गौ-शाला के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में मुख्यतिथि के रुप में पहुचे। कार्यक्रम में पहुचने पर गुरुकल के आचर्य व अन्य प्रचार्यगणों ने फुल मालो व पगड़ी बांधकर जोरदार स्वागत किया।
इस मौके पर खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रण मामले मंत्री कर्णदेव कम्बोज ने लोगो को संबोधित करते हुए कहा कि महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती (1824-1883) आधुनिक भारत के महान चिन्तक, समाज-सुधारक व देशभक्त थे। उनका बचपन का नाम मूलशंकर था। उन्होंने कहा कि 1874 में एक आर्य सुधारक संगठन - आर्य समाज की स्थापना की। वे एक संन्यासी तथा एक महान चिंतक थे। उन्होंने वेदों की सत्ता को सदा सर्वोपरि माना। स्वामीजी ने कर्म सिद्धान्त, पुनर्जन्म, ब्रह्मचर्य तथा सन्यास को अपने दर्शन के चार स्तम्भ बनाया। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानन्द के प्रमुख अनुयायियों में लाला हंसराज ने 1886 में लाहौर में दयानन्द एंग्लो वैदिक कॉलेज की स्थापना की तथा स्वामी श्रद्धानन्द ने 1901 में हरिद्वार के निकट कांगड़ी में गुरुकुल की स्थापना की।
श्री कर्णदेव कम्बोज ने कहा कि उनके जीवन में ऐसी बहुत सी घटनाएं हुईं, जिन्होंने उन्हें हिन्दू धर्म की पारम्परिक मान्यताओं और ईश्वर के बारे में गंभीर प्रश्न पूछने के लिए विवश कर दिया। एक बार शिवरात्रि की घटना है। तब वे बालक ही थे। शिवरात्रि के उस दिन उनका पूरा परिवार रात्रि जागरण के लिए एक मन्दिर में ही रुका हुआ था। सारे परिवार के सो जाने के पश्चात् भी वे जागते रहे कि भगवान शिव आयेंगे और प्रसाद ग्रहण करेंगे। उन्होंने देखा कि शिवजी के लिए रखे भोग को चूहे खा रहे हैं। यह देख कर वे बहुत आश्चर्यचकित हुए और सोचने लगे कि जो ईश्वर स्वयं को चढ़ाये गये प्रसाद की रक्षा नहीं कर सकता वह मानवता की रक्षा क्या करेगा, इस बात पर उन्होंने अपने पिता से बहस की और तर्क दिया कि हमें ऐसे असहाय ईश्वर की उपासना नहीं करनी चाहिए। इस मौके पर मंत्री ने अपने निजि कोष से 11 लाख रुपए देने की घोषणा की और 11 हजार रुपए मौके पर गुरुकुल के छात्रों को दिए।
उन्होने कहा कि वेदों को छोड़ कर कोई अन्य धर्मग्रन्थ प्रमाण नहीं है, इस सत्य का प्रचार करने के लिए स्वामी जी ने सारे देश का दौरा करना प्रारंभ किया और जहां-जहां वे गये प्राचीन परंपरा के पंडित और विद्वान उनसे हार मानते गये। संस्कृत भाषा का उन्हें अगाध ज्ञान था। संस्कृत में वे धाराप्रवाह बोलते थे। साथ ही वे प्रचंड तार्किक थे। उन्होने कहा कि स्वामीजी प्रचलित धर्मों में व्याप्त बुराइयों का कड़ा खण्डन करते थे चाहे वह सनातन धर्म हो या इस्लाम हो या ईसाई धर्म हो। अपने महाग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में स्वामीजी ने सभी मतों में व्याप्त बुराइयों का खण्डन किया है। उनके समकालीन सुधारकों से अलग, स्वामीजी का मत शिक्षित वर्ग तक ही सीमित नहीं था अपितु आर्य समाज ने आर्यावर्त (भारत) के साधारण जनमानस को भी अपनी ओर आकर्षित किया।
गौ-सेवा आयोग के चैयरमैन भानीराम मंगला ने कहा कि प्रदेश सरकार अब जेलों में जल्द गौ-शाला बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां कही भी कोई आवारा गाय पाई जाती है उन्हें पकड कर गौ-शाला के अंदर किया जाएगा। गौ-सेवा आयोग के चैयरमैन ने बताया कि प्रदेश की 278 गौ-शाला में जल्द ही सभी सौलर लाईट लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि गाय के मुत्र से बनने वाली फिनाईल व अन्य उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गौ-शाला में गमलों का निर्माण किया जाएगा, जिसमें वन मंडल अधिकारी का सहयोग लिया जाएगा। इस मौके पर गौ-सेवा आयोग के चैयरमैन व मंत्री द्वारा कई गौ-शालों को लगभग 19 लाख 91 हजार 800 रुपए के चैक वितरित किए।
इस मौके पर आर्च श्रीनिवास, आर्चय वेद निष्ट, नरदेव, भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र प्रताप आर्य,ज्ञानचंद आर्य, राजकुमार महामंत्री, पवन बघेल गांगोली जिला सचिव,चर्तुभुज सरपंच भादस सहित गुरुकुल के छात्र व आम जनता के लोग मौजूद रहे।
(बिलाल अहमद)
ब्यूरो रिपोर्ट नूह मेवात।
खास खबर:खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रण मामले के मंत्री करण देव कंबोज ने नगीना खंड के गांव भादस में महर्षि दयानंद आर्य गुरुकुल गोशाला के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे।
खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रण मामले मंत्री कर्ण देव कम्बोज ने नगीना खंड के गांव भादस में महर्षि दयानंद आर्य गुरुकुल एवं गौ-शाला के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में मुख्यतिथि के रुप में पहुचे। कार्यक्रम में पहुचने पर गुरुकल के आचर्य व अन्य प्रचार्यगणों ने फुल मालो व पगड़ी बांधकर जोरदार स्वागत किया।
इस मौके पर खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रण मामले मंत्री कर्णदेव कम्बोज ने लोगो को संबोधित करते हुए कहा कि महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती (1824-1883) आधुनिक भारत के महान चिन्तक, समाज-सुधारक व देशभक्त थे। उनका बचपन का नाम मूलशंकर था। उन्होंने कहा कि 1874 में एक आर्य सुधारक संगठन - आर्य समाज की स्थापना की। वे एक संन्यासी तथा एक महान चिंतक थे। उन्होंने वेदों की सत्ता को सदा सर्वोपरि माना। स्वामीजी ने कर्म सिद्धान्त, पुनर्जन्म, ब्रह्मचर्य तथा सन्यास को अपने दर्शन के चार स्तम्भ बनाया। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानन्द के प्रमुख अनुयायियों में लाला हंसराज ने 1886 में लाहौर में दयानन्द एंग्लो वैदिक कॉलेज की स्थापना की तथा स्वामी श्रद्धानन्द ने 1901 में हरिद्वार के निकट कांगड़ी में गुरुकुल की स्थापना की।
श्री कर्णदेव कम्बोज ने कहा कि उनके जीवन में ऐसी बहुत सी घटनाएं हुईं, जिन्होंने उन्हें हिन्दू धर्म की पारम्परिक मान्यताओं और ईश्वर के बारे में गंभीर प्रश्न पूछने के लिए विवश कर दिया। एक बार शिवरात्रि की घटना है। तब वे बालक ही थे। शिवरात्रि के उस दिन उनका पूरा परिवार रात्रि जागरण के लिए एक मन्दिर में ही रुका हुआ था। सारे परिवार के सो जाने के पश्चात् भी वे जागते रहे कि भगवान शिव आयेंगे और प्रसाद ग्रहण करेंगे। उन्होंने देखा कि शिवजी के लिए रखे भोग को चूहे खा रहे हैं। यह देख कर वे बहुत आश्चर्यचकित हुए और सोचने लगे कि जो ईश्वर स्वयं को चढ़ाये गये प्रसाद की रक्षा नहीं कर सकता वह मानवता की रक्षा क्या करेगा, इस बात पर उन्होंने अपने पिता से बहस की और तर्क दिया कि हमें ऐसे असहाय ईश्वर की उपासना नहीं करनी चाहिए। इस मौके पर मंत्री ने अपने निजि कोष से 11 लाख रुपए देने की घोषणा की और 11 हजार रुपए मौके पर गुरुकुल के छात्रों को दिए।
उन्होने कहा कि वेदों को छोड़ कर कोई अन्य धर्मग्रन्थ प्रमाण नहीं है, इस सत्य का प्रचार करने के लिए स्वामी जी ने सारे देश का दौरा करना प्रारंभ किया और जहां-जहां वे गये प्राचीन परंपरा के पंडित और विद्वान उनसे हार मानते गये। संस्कृत भाषा का उन्हें अगाध ज्ञान था। संस्कृत में वे धाराप्रवाह बोलते थे। साथ ही वे प्रचंड तार्किक थे। उन्होने कहा कि स्वामीजी प्रचलित धर्मों में व्याप्त बुराइयों का कड़ा खण्डन करते थे चाहे वह सनातन धर्म हो या इस्लाम हो या ईसाई धर्म हो। अपने महाग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश में स्वामीजी ने सभी मतों में व्याप्त बुराइयों का खण्डन किया है। उनके समकालीन सुधारकों से अलग, स्वामीजी का मत शिक्षित वर्ग तक ही सीमित नहीं था अपितु आर्य समाज ने आर्यावर्त (भारत) के साधारण जनमानस को भी अपनी ओर आकर्षित किया।
गौ-सेवा आयोग के चैयरमैन भानीराम मंगला ने कहा कि प्रदेश सरकार अब जेलों में जल्द गौ-शाला बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां कही भी कोई आवारा गाय पाई जाती है उन्हें पकड कर गौ-शाला के अंदर किया जाएगा। गौ-सेवा आयोग के चैयरमैन ने बताया कि प्रदेश की 278 गौ-शाला में जल्द ही सभी सौलर लाईट लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि गाय के मुत्र से बनने वाली फिनाईल व अन्य उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गौ-शाला में गमलों का निर्माण किया जाएगा, जिसमें वन मंडल अधिकारी का सहयोग लिया जाएगा। इस मौके पर गौ-सेवा आयोग के चैयरमैन व मंत्री द्वारा कई गौ-शालों को लगभग 19 लाख 91 हजार 800 रुपए के चैक वितरित किए।
इस मौके पर आर्च श्रीनिवास, आर्चय वेद निष्ट, नरदेव, भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेन्द्र प्रताप आर्य,ज्ञानचंद आर्य, राजकुमार महामंत्री, पवन बघेल गांगोली जिला सचिव,चर्तुभुज सरपंच भादस सहित गुरुकुल के छात्र व आम जनता के लोग मौजूद रहे।

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