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पराली का धुआं पर्यावरण और जनता की सेहत पर पड़ रहा भारी
पटाखों व पराली के खिलाफ पर्यावरण केयर अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत
बड़कली से नगीना तक रैली निकालकर किया जागरूक
बिलाल अहमद/ब्यूरो नूह मेवात।
एनसीआर में पराली जलाने से बढ़ते हुए धोए का असर लगातार लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। दूसरी तरफ टीबी और अस्थमा से पीड़ित मरीजों को सांस लेने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस भयानक मुद्दे पर पर्यावरण केयर काम कर रहा है। शुक्रवार को अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत मेवात क्षेत्र के बीचों-बीच बड़कली चौक से हुई। लोगों ने बड़कली चौक से कस्बा नगीना तक रैली निकाली। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद मुनीराम जैन ने की। अभियान के संरक्षक राजूद्दीन का कहना है कि किसानों वे लोगों में जागरूकता बढ़ाने से ही पराली और फसल के अवशेषों को जलाने से बचाया जा सकता है। यही बड़ा कारण है जो हमारे पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है निरंतर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा घटना और कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता होना हमारे स्वास्थ्य को बिगाड़ रहा है। समाजसेवी राजूद्दीन ने कहा कि अगर हम चुप रहे तो क्षेत्र की आबोहवा जहरीली साबित होगी और सांस लेने में ये बड़ा घातक सिद्ध होगी। इसीलिए सभी लोग खुद जागरूक हों और अपने आसपास के किसानों को जागरूक करने में भूमिका निभाएं। राष्ट्रवादी कवि इलियास प्रधान ने कहा कि देश की आबोहवा दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ सालों में देश में लाखों लोग केवल इस प्रकोप की चपेट में आने से मर चुके है। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय भी बार-बार हरियाणा और पंजाब राज्य से अनुरोध है कि किसानों को जागरूक करें तथा क्षेत्रों में पराली जलाने वाले किसानों पर शिकंजा कसा। कंसाली गांव के पूर्व सरपंच हारून खान ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण से लोगों की आंखों में तकलीफ हो रही है तथा बच्चों पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है। अगर समय रहते इसे रोका नहीं कहा तो इसका स्तर जानलेवा हो जाएगा और हवा में ऑक्सीजन की मात्रा के बराबर रह जाएगी। नंबरदार ओमप्रकाश ने कहा कि मेवात क्षेत्र के लोगों को भी कूड़ा कर्कट जलाने से परहेज करना पड़ेगा क्योंकि लोग घरों में अभी भी कूड़ा जलाने से बाज नहीं आ रहे। राहुल सिंगला व ताहिर हुसैन का कहना है कि पिछले कई सालों से पर्यावरण केयर मुहिम लोगों को दीपावली पर पटाखे चलाने के लिए भी जागरूक करता रहा है। साथ ही पराली नहीं जलाने की शपथ किसानों को दिलाता आ रहा है। जिले के किसान अब अपने खेतों में भी अवशेषों को नहीं जलाते। इस अवसर पर सामाजिक संगठन गालिब मौजी फाउंडेशन, मेवात सूचना अधिकार मंच, महिला संगठन जागो चलो के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
पराली का धुआं पर्यावरण और जनता की सेहत पर पड़ रहा भारी
पटाखों व पराली के खिलाफ पर्यावरण केयर अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत
बड़कली से नगीना तक रैली निकालकर किया जागरूक
बिलाल अहमद/ब्यूरो नूह मेवात।
एनसीआर में पराली जलाने से बढ़ते हुए धोए का असर लगातार लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। दूसरी तरफ टीबी और अस्थमा से पीड़ित मरीजों को सांस लेने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस भयानक मुद्दे पर पर्यावरण केयर काम कर रहा है। शुक्रवार को अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत मेवात क्षेत्र के बीचों-बीच बड़कली चौक से हुई। लोगों ने बड़कली चौक से कस्बा नगीना तक रैली निकाली। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद मुनीराम जैन ने की। अभियान के संरक्षक राजूद्दीन का कहना है कि किसानों वे लोगों में जागरूकता बढ़ाने से ही पराली और फसल के अवशेषों को जलाने से बचाया जा सकता है। यही बड़ा कारण है जो हमारे पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है निरंतर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा घटना और कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता होना हमारे स्वास्थ्य को बिगाड़ रहा है। समाजसेवी राजूद्दीन ने कहा कि अगर हम चुप रहे तो क्षेत्र की आबोहवा जहरीली साबित होगी और सांस लेने में ये बड़ा घातक सिद्ध होगी। इसीलिए सभी लोग खुद जागरूक हों और अपने आसपास के किसानों को जागरूक करने में भूमिका निभाएं। राष्ट्रवादी कवि इलियास प्रधान ने कहा कि देश की आबोहवा दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ सालों में देश में लाखों लोग केवल इस प्रकोप की चपेट में आने से मर चुके है। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय भी बार-बार हरियाणा और पंजाब राज्य से अनुरोध है कि किसानों को जागरूक करें तथा क्षेत्रों में पराली जलाने वाले किसानों पर शिकंजा कसा। कंसाली गांव के पूर्व सरपंच हारून खान ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण से लोगों की आंखों में तकलीफ हो रही है तथा बच्चों पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है। अगर समय रहते इसे रोका नहीं कहा तो इसका स्तर जानलेवा हो जाएगा और हवा में ऑक्सीजन की मात्रा के बराबर रह जाएगी। नंबरदार ओमप्रकाश ने कहा कि मेवात क्षेत्र के लोगों को भी कूड़ा कर्कट जलाने से परहेज करना पड़ेगा क्योंकि लोग घरों में अभी भी कूड़ा जलाने से बाज नहीं आ रहे। राहुल सिंगला व ताहिर हुसैन का कहना है कि पिछले कई सालों से पर्यावरण केयर मुहिम लोगों को दीपावली पर पटाखे चलाने के लिए भी जागरूक करता रहा है। साथ ही पराली नहीं जलाने की शपथ किसानों को दिलाता आ रहा है। जिले के किसान अब अपने खेतों में भी अवशेषों को नहीं जलाते। इस अवसर पर सामाजिक संगठन गालिब मौजी फाउंडेशन, मेवात सूचना अधिकार मंच, महिला संगठन जागो चलो के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

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